वो मेरे ख्वाबों में आतीं है,
ना सालों की धूल, ना वक़्त की लखीरे,
उसका चेहरा मुझे अब भी साफ़ नज़र आता है
वो चांदनी रात,
उसका हलके से हाथ पकड़ना और फिर कुछ ना कहना,
चंद लम्हे चाँद भी चुप जाता, हवाए भी थम जाती,
उसकी आँखों में जैसे समां सारा...समा जाता
उसकी आँखों में मेरा जहाँ सारा...समा जाता
ना सालों की धूल, ना वक़्त की लखीरे,
उसका चेहरा मुझे अब भी साफ़ नज़र आता है